वायु

भारतीय वायुसेना

  1. भारतीय वायुसेना आज आधुनिकीकरण तथा योग्य नेतृत्व के माध्यम से गतिशील प्रौद्योगिकीय भूमण्डलीकृत चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार विश्वसनीय वायु आकाश बल होने के पथ पर पूर्ण रूप से स्थापित की गई है । यह सुव्यवस्थित पहुंच के माध्यम से उपलब्ध "जनता पहले मिशन सदैव" की अपनी वचनबद्धता पर दृढ़ है जो सामरिक, युक्तिसंगत तथा राष्ट्रनिर्माण क्षमताओं को बनाएंगें । क्योंकि इसने बारहवीं पंचवर्षीय योजना अवधि में प्रवेश किया है, अतः भारतीय वायुसेना उन क्षमताओं को प्राप्त करने में संतुलित है जो इसे सम्पूर्ण संघर्ष स्पेक्ट्रम में नेटवर्क केन्द्र समर्थ संक्रियाओं के संचालित की अनुमति देता है । सैन्य प्रौद्योगिकी विकास नई चुनौतियों को प्रस्तुत करता है और राष्ट्रीय हितों के अनुसरण में नई और चालू सैन्य क्षमताओं का उत्थान करने के लिए अनोखे अवसर प्रदान करता है । इस रणनीति के अनुसरण में, भारतीय वायु सेना ने संपूर्ण वायु रक्षा नेटवर्क की मरम्मत अत्याधुनिक परिशुद्ध हथियारों तथा अन्य समर्थनीय प्रौद्योगिकियों सहित अग्रिम युद्धक विमान के अधिग्रहण के लिए एक रूपरेखा तैयार की है । इसने सी-130 जे विशेष संक्रिया यातायात विमान तथा एम आई-17 वी 5 मध्यम लिफ्ट हेलीकॉप्टरों शामिल करके इसके यातायात और हेलीकॉप्टर बेड़ो को भी मजबूत किया है।
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भर्ती और प्रशिक्षण

अधिकारियों की भर्ती

  1. भारतीय वायुसेना में अधिकारियों के चयन की नीति अनिवार्य रूप से मेरिट पर आधारित है और यह देश के सभी नागरिकों के लिए खुला है । प्रौद्योगिकीय प्रोत्साहन सेवा होने के नाते भारतीय वायुसेना कार्मिकों को शामिल करने के लिए उच्च मानक बनाए रखने का प्रयास करती है।
  2. अधिकारियों को शामिल किया जाना. संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी तथा संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा प्रविष्टियां, संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से अधिकारी संवर्ग के लिए मुख्य फीडर हैं । अधिकारी वंर्ग में शामिल किए जाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग से इतर प्रविष्टियां है :- अल्प सेवा आयोग (एस एस सी) (पुरुष और महिला) उड़ान, एन जी सी प्रवेश (पुरुष स्थायी कमीशन), ग्राउंड ड्यूटी अधिकारी कमीशन (जी डी ओ सी) (तैर-तकनीकी) (पुरुष स्थायी कमीशन), एअर मैन भर्ती (वायु योद्धा स्थायी कमीशन), अल्प सेवा कमीशन (तकनीकी) (पुरुष और महिला), तथा अल्प सेवा कमीशन (गैर-तकनीकी), (पुरुष और महिला) ।
  3. सेवा चयन बोर्डो के माध्यम से भर्ती. सेवा चयन बोर्डों/वायु सेना चयन बोर्डों के माध्यम से भर्ती, वायुसेना की उड़ान (पायलट), एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (इलैक्ट्रानिक्स), एयरोनॉटिक्स इंजीनियरिंग (मैकेनिकल), शिक्षा; प्रशासन, संभार-तंत्र, लेखा और मौसम विज्ञान शाखाओं के लिए की जाती है ।
  4. विश्वविद्यालय प्रवेश स्कीम. इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के अन्तिम/अन्तिम पूर्व वर्ष के विद्यार्थी, विश्वविद्यालय प्रवेश स्कीम के अंतर्गत स्थायी कमीशन अधिकारियों के रूप में वायुसेना की तकनीकी शाखाओं में शामिल होने के लिए पात्र हैं।
  5. सेवा प्रवेश स्कीम. इस प्रदेश के अंतर्गत; सार्जेण्ट और इससे ऊपर के रैंक के न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा करने वाले अधिकारी जिनकी आयु 36 और 42 वर्ष के मध्य है तथा न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 10+2 है, यूनिट स्तर पर छानबीन तथा तत्पश्चात वायुसेना चयन बोर्ड चयन परीक्षण तथा चिकित्सा परीक्षण करने के बाद कमीशन के लिए पात्र होते हैं ।
  6. महिला अधिकारियों की भर्ती. पात्र महिलाओं की अल्प सेवा कमीशन अधिकारियों के रूप में भर्ती वायु सेना की उड़ान, एयरोनॉटिकता इंजीनियरिंग (इलैक्ट्रानिक्स), एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (मैकेनिकल), शिक्षा प्रशासन, संभारतंत्र, लेखा और मौसम विज्ञान शाखाओं में की जाती है । फिर भी, वे महिलाएं जो भारतीय वायुसेना की शिक्षा, लेखा और प्रशासन (विधि) शाखाओं में जनवरी, 2009 से प्रारंभ होने वाले प्रशिक्षण में शामिल हुई हैं, पात्रता निर्धारण तथा उपयुक्तता तथा सेवा अपेक्षाओं को पूरा करने वाली उपलब्ध रिक्तियों के अध्यधीन स्थायी कमीशन को प्राप्त करने हेतु पात्र होंगी ।
  7. राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन सी सी) के माध्यम से भर्ती. विश्वविद्यालय स्नातक जिन्होंने न्यूनतम‘बी’ ग्रेडिंग सहित एन सी सी ‘सी’ प्रमाण पत्र तथा स्नातक में 60% अंक प्राप्त किया है, सेवा चयन बोर्डों के माध्यम से चयन द्वारा नियमित कमीशन अधिकारी के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल होते हैं ।
  8. भर्तीः अधिकारी रैंक से नीचे के कार्मिक अधिकारी रैंक से नीचे के कार्मिकों के लिए उम्मीदवारों का चयन अखिल भारतीय आधार पर केन्द्रीकृत चयन प्रणाली के माध्यम से किया जाता है जिसमें देश के विभिन्न भागों में अवस्थित 14 वायु सैनिक चयन केन्द्रों द्वारा सहायता प्राप्त केन्द्रीय वायु सैनिक चयन बोर्ड भर्ती करता है ।
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भारतीय वायुसेना तथा सिविल अधिकारियों के मध्य सहयोग

  1. भारतीय वायुसेना विभिन्न सिविल सहायता राहत उपायों में लगी हुई है । भारतीय वायुसेना के यातायात तथा हेलीकॉप्टर बेड़े ने प्राकृतिक आपदा तथा विपदा के दौरान केन्द्र तथा राज्य सरकारों की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । यातायात तथा हेलीकाप्टर की एयरलिफ्ट क्षमता वाले बेड़े में विशेष संक्रियाएं सी-130 जे विमान की लंबी रेंज के शामिल होने से महत्वपूर्ण वृद्धि दिखाई दी है; जिसने सिक्किम भूकम्प के परिणाम में राहत संक्रिया को सिद्ध किया है । यातायात तथा हेलीकॉप्टर बेड़े, आवंटित कार्य, संपादित करके; बंजर भू-भाग, अधिकांश उड़ान भरकर विश्वासपरक तरीके से कार्य निष्पादित करते रहे हैं । उत्तरवर्ती पैराग्राफ में कुछ उपलब्धियां उजागर की गई हैं।
  2. उत्तरी एवं पूर्वोत्तर सेक्टर में वायुसेना द्वारा अनुरक्षण Air Maintenance operations by the transport and helicopter fleets of the Indian Air Force are undertaken in support of troops and civilian population in far flung areas and inhospitable terrain conditions in the North and North-Eastern parts of the country. The sustained operations round the year comprise airlift of food material, clothing, medical equipment etc. Air maintenance activities assume special significance in the winter months when snowfall and inclement weather conditions impede normal surface transport links to these areas.
  3. A total of 15,930 tonnes of logistics support load for the Northern sector and 2995 tonnes for the North Eastern sector have been airlifted since April 11, 2011. Routine flights are operated from Kargil to Jammu & Srinagar during the winter months.
  4. Logistics support to Border Roads Organisation (BRO): The transport & helicopter fleets of the Indian Air Force airlifted 640 metric tonnes of supplies in support of the Border Roads Organisation (BRO) in the Central & Northern sectors and at their posts along the international borders.
  5. Humanitarian Assistance & Disaster Relief Operations: Train Accident. IAF participated in relief and rescue operations in the aftermath of Howrah-Kalka train accident on July 10, 2011 near Kanpur. A total of 148 passengers and 600 kg of medical supplies were airlifted.
  6. Earthquake in Sikkim: Within hours of the earthquake in Sikkim on September 18, 2011, two C-130J aircraft were airborne from Delhi with 13 Tons of relief material and 220 National Disaster Response Force (NDRF) personnel. A total of 527 sorties comprising 294 hours on a variety of aircrafts and helicopters airlifted 252 tonnes of relief material and transported 1714 people in sustained operations until October 11, 2011. IAF helicopters undertook rescue missions wherein a total of 525 persons were airlifted from inaccessible areas to safe locales. Numerous sorties were flown towards sustaining Army units at the International Border, which included supply of diesel, fuel and emergency rations.
  7. Bhubaneshwar (Orissa) Flood Relief: In September 2011, the State of Orissa was hit by floods, affecting the lives and livelihood of 16 lakh people. In response to a call by the State Government, Indian Air force deployed one Chetak and seven Mi-17 helicopters in missions to provide succor to people in the affected areas. The IAF Task Force airdropped 118.64 Tonnes of relief material in 90 sorties entailing a flying effort of 116 hours.
  8. Evacuation of Foreign Nationals: The helicopter fleet of the Indian Air Force evacuated 28 foreign nationals since April 2011 from inaccessible high altitude areas of J&K, Uttarakhand and Himachal Pradesh.
  9. Power Supply in J & K Valley Restored by IAF: On January 06, 2012, Jammu and Kashmir experienced excessive snow fall, which resulted in a power failure across the entire Srinagar valley. In response to a request from the J&K Govt, the IAF took on the challenging task of assisting Power Grid Corporation of India in restoration of power supply to the valley. After an aerial recce of the power lines from Ramban to Banihal, a damaged tower near Ramsu village was identified as the main cause of power failure.
  10. On January 08, 2012, a repair team was winched down from a Mi-17 helicopter in inclement weather & gusty winds as there was no helipad in the vicinity. Within hours, the tower was repaired and power supply restored to the entire valley. The next day, the same crew undertook a similar task winching down four personnel to carry out further repairs in equally bad weather.
  11. Overseas Missions: SAARC Summit. One An-32 transport aircraft of the IAF was deployed in phases at Male from October 22 - 28, 2011 and November 02 - 15, 2011 in connection with the SAARC summit to cater to contingent requirements.
  12. UN Mission: The Indian Aviation Contingent deployed at Bukavu (Democratic Republic of Congo) comprising six Mi-17 and four Mi-35 helicopters, along with 303 personnel, were repatriated in two phases that ended in September, 2011. The helicopter fleet of Indian Air Force has flown a total of 235 sorties entailing a flying effort of 280 hrs during the period April to September, 2011 while deployed at these missions.
  13. Anti LWE Operations: In 2011, Left Wing Extremist (LWE) activities have been witnessed mainly in Assam, Western Orissa and Arunachal Pradesh. Four MI-17 helicopters of Indian Air Force have been operating since December 20, 2009 in support of Ministry of Home Affairs (MHA) for anti-naxal operations. Four helicopters are deployed to assist security forces in LWE affected areas. Since induction, a total of 2492 hrs in 3602 sorties have been flown in support of operations to airlift casualties, passengers and loads. Additionally, on request of Ministry of Home Affairs, slithering training of troops has been conducted in which 1142 troops have been trained till date.
  14. For more details on IAF aid to civil authorities please click here IAF
  15. Director (Air-I), Tel No. 2301 1872 is the Web Information Manager of Air Wing of MoD.